शुक्रवार, अप्रैल 08, 2016

बवाल ही बवाल है
तीरगी है जाल है

धर्मों की मंडी में
जनता बस माल है

ईश्वर है अल्ला है
इंसा मुहाल है

रोटी के वादे हैं
वोट का सवाल है

राम का मुखौटा हैै
रावण की चाल है

कोई टिप्पणी नहीं: