रविवार, अक्तूबर 23, 2016

दास्तान

अपनी सुरक्षा के लिये धीरे-धीरे 
खुद को दीवारों में क़ैद करते गये लोग
फिर यूं होते गये
एक दूसरे-से दूर
कि सुरक्षा तो ख़ैर क्या होती
क़ैद ही मजबूत होती गई.
अब चाभी बनाने के सब औज़ार
तो क़ैद के बाहर ही छोड़ आये.
और ज्ञानियों की वो किताब भी
जिसमें लिखा था
अकेलेपन का लोहा
गलाने का विज्ञान.

शुक्रवार, अप्रैल 08, 2016

बवाल ही बवाल है
तीरगी है जाल है

धर्मों की मंडी में
जनता बस माल है

ईश्वर है अल्ला है
इंसा मुहाल है

रोटी के वादे हैं
वोट का सवाल है

राम का मुखौटा हैै
रावण की चाल है